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Sunday, 14 August 2011

आज़ादी का नया गीत

छह   दशकों  के  बाद  भी  चले  भूख  का  राज   |
किनको आज़ादी  मिली  विकट प्रश्न यह आज  | |
विकट  प्रश्न  यह  आज  तिरंगा  क्यों  फहराएँ   ?
किस  मुंह  से  हम  आज़ादी  का  जश्न  मनाएं ?
लाल  किले  से  भाषण   खूब  पिलाने   वालों   ?
 जनता  को  बहलाने  और  फुसलाने   वालों    ?
फिर   गांधी   की   आहट  पा  कर भौंक रहे हो ?
भगत   सिंह   की  गुर्राहट  पे  चौंक  रहे   हो   ?
इंक़लाब का बिगुल  बजाना  ही  होगा  चौराहों  पर  |
और नगाड़ा उलगुलान का सत्ता के गलियारों पर  ||

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