There was an error in this gadget

Wednesday, 10 August 2011

यशवंती रस

यशवंती रस टपका तो कोड़ा हुए निहाल |
खुली पोटली सत्य की जम कर मचा बवाल||
जम कर मचा बवाल माकन जी घबराये |
खूब  तरेरी  आँखें ,  भोंहें   खूब    नचाये ||
लेकिन चली न चाल घूस का भांडा फूटा |
सबने मिल कर झारखण्ड को इतना लूटा ||

No comments:

Post a Comment